19/10/2021
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आखिर किस मजबूरी में आंध्र के सीएम जगनमोहन खत्म करना चाहते हैं विधान परिषद?

नई दिल्ली. आंध्र प्रदेश विधानसभा ने अपने उच्च सदन यानी विधान परिषद को खत्म करने का प्रस्ताव पास कर दिया है. इसके साथ ही यह बहस छिड़ गई है कि क्या कोई विधानसभा ऐसा कर सकती है? संविधान विशेषज्ञ का जवाब हां में है, लेकिन किसी विधानसभा को सिर्फ इसका प्रस्ताव पास करने का ही अधिकार है. इसकी फाइनल मुहर केंद्र सरकार ही लगाएगी. दरअसल, आंध्र की 58 सदस्यीय विधान परिषद में जगनमोहन रेड्डी की पार्टी (YSRCP) अल्पमत में है, जबकि उनके विरोधी चंद्रबाबू नायडू की तेलगू देशम पार्टी को बहुमत है. ऐसे में जगनमोहन के ड्रीम प्रोजेक्ट पर ब्रेक लग जाता है. उससे नायडू की पार्टी पास नहीं होने देती, इसलिए उन्होंने इस कांटे को ही निकालने का फैसला कर लिया.

जाने-माने संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप कहते हैं कि विधान परिषद भंग करने के लिए विधानसभा के पास प्रस्ताव पास करने का अधिकार है, लेकिन यह प्रस्ताव केंद्र के पास भेजना पड़ेगा. केंद्र की संस्तुति के बाद संवैधानिक प्रमुख की कलम से ही इसे खत्म किया जा सकता है. इसे भंग करने का पूरा अधिकार न तो राज्य के पास है और न ही केंद्र के पास. दोनों मिलकर ही ऐसा कर सकते हैं. विधान परिषदों के कैंसिलेशन या सृजन का प्रस्ताव अनुच्छेद 169 में किया गया है.

Subhash kashyap
प्रसिद्ध संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप. (File Photo)

जगनमोहन की मजबूरी क्या है?

जगन मोहन आंध्र प्रदेश में तीन राजधानियां चाहते हैं. इस बारे में एक बिल जब विधान परिषद में लाया गया तो विधान परिषद ने इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया. इससे जगन मोहन का ड्रीम प्रोजेक्ट लटक गया. उच्च सदन में टीडीपी के 27 जबकि YSRCP के 9 विधायक हैं. इसीलिए सीएम जगनमोहन ने विधानसभा में इस प्रस्ताव से पहले कहा, ‘हमें इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है कि क्या ऐसा सदन होना चाहिए, जो केवल राजनीतिक मंशा के साथ काम करता है.’ विधान परिषद होना अनिवार्य नहीं है. यह हमारा ही बनाया हुआ है और केवल हमारी सुविधा के लिए है.’

मुख्यमंत्री के मुताबिक, ‘विधान परिषद से सरकार के अहम फैसलों पर सलाह की अपेक्षा होती है, लेकिन उच्‍च सदन राजनीतिक मंच में तब्‍दील हो गया है. सरकार की ओर से पेश किया गया हर विधेयक विधान परिषद में रोक दिया जाता है. विधानसभा में कई बुद्धिजीवी, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और संविधान विशेषज्ञ मौजूद हैं. ऐसे में राज्‍य में उच्‍च सदन की कोई प्रासंगिकता नहीं है. लिहाजा, राज्य को अलग विधान परिषद की जरूरत नहीं.’

कितने राज्यों में है विधान परिषद 

इस समय तेलंगाना, यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उच्च सदन है. जम्मू-कश्मीर में भी उच्च सदन था लेकिन आर्टिकल 370 में संशोधन के वक्त इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने से पहले एक आदेश जारी कर 62 साल पुरानी राज्य विधान परिषद को 2019 में भंग कर दिया गया था.

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