19/10/2021
HAMIRPUR HIMACHAL PARDESH

8 घण्टे तक दिल में छेद की बीमारी से जूझ रहे 15 दिन के नवजात को टांडा ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल पाई,फिर मीडिया की उच्च अधिकारियों से वार्ता के बाद 8 बजे टांडा ले जाने के लिए उपलब्ध हुई एबुलेंस

हमीरपुर/
मेडिकल कालेज एवं अस्पताल हमीरपुर में मंगलवार के दिन दिल में छेद की बीमारी से जूझ रहे 15 दिन के नवजात को टांडा ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल पाई। नवजात के दिल में छेद होने के कारण इसे उपचार के लिए मंगलवार सुबह करीब 11:30 बजे टांडा मेडिकल कालेज के लिए रैफर कर दिया गया। सुबह रेफर करने के उपरांत शाम 7:30 बजे तक भी नवजात को टांडा ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल पाई। मीडिया को जब समस्या की सूचना मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज में पहुंचे फिर अधिकारियों से बातचीत करने के बाद करीब 8:00 बजे एंबुलेंस उपलब्ध हुई तब कहीं जाकर बच्चे को टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए ले जाया गया।

नवजात के पिता सुदेश कुमार ने बताया कि उनके बच्चे के दिल में छेद है। ऐसे में बच्चे को टांडा मेडिकल कालेज के लिए रैफर किया गया है। कई घंटों तक एंबुलेंस नहीं मिल पाने से निराश बच्चे के परिजनों ने अस्पताल के प्रबंधों को सवालों के कटघरे में खड़ा किया है। इनका कहना था कि एंबुलेंस के लिए डाक्टर सहित अस्पताल के मेडिकल सपुरीटेंडेंट से भी बात कर चुके हैं।
पंचायत समिति हमीरपुर के उपाध्यक्ष संजीव कुमार का कहना है कि यदि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन अथवा 108 एंबुलेंस प्रबंधन यदि एंबुलेंस उपलब्ध करवाने में सक्षम नहीं था तो उनको पहले ही पर परिजनों को सूचित कर देना चाहिए था ताकि उनके लिए कोई अन्य प्रबंध किया जा सकता यह बेहद गलत है।

आपको बता देंगे एंबुलेंस के लिए इस मासूम के परिजन अस्पताल में भटकते रहे। यहां तक की प्रबंधन वर्ग को भी इस बारे में अवगत करवाया गया, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिल पाई। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन के पुख्ता प्रबंधों के दावों पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। आखिरकार क्यों सारा दिन मासूम को टांडा ले जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी।
जानकारी के अनुसार उपमंडल सुजानपुर के तहत आने वाले गवारडू पंचायत के लोहाखर गांव की महिला के 15 दिन के नवजात के दिल में छेद है। दिल में छेद होने के कारण इसे आक्सीजन के साथ मशीन में रखा गया था। मंगलवार के दिन चिकित्सकों ने इसे नवजात को मेडिकल कालेज टांडा के लिए रैफर कर दिया। रैफर किए जाने की बात सुबह 10 बजे हुई जबकि रैफर करने की सभी औपचारिकताएं करीब 11:30 बजे तक पूरी हो गईं। इसके बाद एंबुलेंस की तलाश शुरू हुई। कभी डाक्टरों तो कभी प्रबंधन वर्ग के चक्कर लगाने के बाद भी मासूम के परिजनों को एंबुलेंस नहीं मिली। जब एंबुलेंस को कॉल की गई तो पता चला कि एंबुलेंस कहीं बाहर है। सुबह 11:30 बजे रैफर किए जाने के उपरांत शाम 7:30 बजे तक भी एंबुलेंस नहीं मिल पाई थी।
आरकेजीएमसी के मेडिकल सुपरीटेंडेंट डा. रमेश चौहान ने कहा कि बच्चे के परिजनों को कहा गया था कि यदि एंबुलेंस नहीं मिल पाएगी तो मुझसे बात करें। उसके बाद उन्होंने बात नहीं की। हालांकि गंभीर हालत में जीवनदायनी एबुलेंस उपलब्ध है। इस एंबुलेंस की सुविधा उन्हें समय पर मिल जाती यदि वह बात कर वास्तव स्थिति के बारे में सही से बता देते। आपसी संपर्क में तालमेल न बैठ पाने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि 8:00 बजे के करीब एंबुलेंस उपलब्ध करवा दी गई है।

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