HIMACHAL PARDESH

भारत को विश्व गुरु बनाएं और कुछ ऐसा करें कि दोबारा कोशिश ना करना पड़े यह हमेशा ही विश्व गुरु बना रहे: धूमल

महान व्यक्ति जहां करते हैं तपस्या वहां बनता है तीर्थस्थल: धूमल

पूर्व मुख्यमंत्री ने किया आह्वान अखंड भारत के स्वप्न को पूरा करने के लिए हर भारतवासी को एकजुट होना होगा
राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन पर आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहां इतिहास गुज़रे दौर का होता है आईना और आईने में तस्वीर साफ रखना है जरूरी तभी उसके गौरव को समझ सकेंगे
महान पुरुष जहां रहते हैं, काम करते हैं और तपस्या करते हैं वे स्थान स्वतः ही तीर्थ स्थल बन जाता है। स्वर्गीय ठाकुर राम सिंह के चरणों में नमन करते हुए मैं उनके तीर्थ स्थल को प्रणाम करता हूं। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल ने आजादी के अमृत महोत्सव के तहत राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन वृतांत, स्मृतियां एवं नेपथ्य नायक विषय पर जगदेव चंद ठाकुर स्मृति शोध संस्थान नेरी में आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद के अवसर पर उपस्थित महानुभावों को संबोधित करने से पहले श्रद्धेय ठाकुर राम सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि  इतिहास का बहुत महत्व है यह बात आप और हम अब समझ रहे हैं लेकिन ठाकुर राम सिंह बहुत पहले यह बात समझ ली थी। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह खुद ऐसा मानते हैं कि जो कौम, देश अथवा समाज अपने इतिहास को याद नहीं रखता, उस पर गौरव करना बंद कर देता है, स्वयं इतिहास ही उस देश या समाज को मिटा देता है।
         राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन को याद करते हुए  पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों की हुकूमत के दौरान हमारे साथ सबसे बड़ी ज्यादा यह हुई थी कि हमें हमारा इतिहास भुलाया गया। हमारे मन में यह बात बिठाई गई कि हम तो हैं ही नालायक, पहले आर्य बाहर से उन्होंने तुम पर राज किया फिर मुगल आए उन्होंने राज किया अब अंग्रेज आ गए हैं तो क्या फर्क है। तुम तो हो ही इस काबिल कि तुम्हारे ऊपर किसी ने राज करना है, तुम खुद राज नहीं कर सकते। यह बात हमारे मन में बैठ गई और हम खुद को पिछड़ा हुआ मानने लग गए। और हम आर्थिक एवं राजनीतिक रूप से यही बल्कि मानसिक रूप से भी गुलाम बन गए। और देखा जाए तो हम आज भी अपने इतिहास के महत्व का बखान करने में शर्म महसूस करते हैं, लेकिन जब वही वही इतिहास विदेशों के द्वारा हमारे सामने लाया जाता है तब उसे मानने लग जाते हैं। जैसे कि वेद, आयुर्वेद, योग इत्यादि सब हमारा इतिहास है, लेकिन जब विदेशों में इनका चलन हुआ और इनको विदेशियों ने मानना और अपनाना शुरू किया, तो हमने भी उन की देखा देखी वेदा, आयुर्वेदा, योगा, रामा और कृष्णा आदि कहना शुरू कर दिया।
          पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन में लाखों ऐसे लोग हैं जो शहीद हो गए जो कुर्बान हो गए लेकिन उनका हम नाम तक नहीं जानते। कितनी यातनाएं उन्होंने सही कितना संघर्षों में क्या हमें कुछ मालूम नहीं। लेकिन पराधीनता आई कैसी थी। हमें टुकड़ों में बांट दिया, गया धड़ों में बांट दिया गया, हमारे समाज को बांट दिया गया। जब जब हिंदू कमजोर हुआ तब तब हम पर राज हुआ है। अखंड भारत बनाना है तो हर भारतवासी को एक होना होगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक तौर पर राजनीतिक तौर पर और सामाजिक तौर पर हमें शक्तिशाली बनना होगा।
       पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा देश शशक्त हो रहा है। आज अमेरिका जैसी विश्व शक्ति को कुछ करना हो तो पहले भारत से पूछता है यह दौर श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जी के टाइम से शुरू हो गया था। आज तो यह स्थिति है कि जो देश कहता था कि हम वीजा नहीं देंगे वह कहते हैं कि हम तो आंखें बिछाए बैठे हैं आप आइए मोदी जी। ऑस्ट्रेलिया जैसे देश कहते हैं कि आप हमारे भाई हैं। जापान वाले भी भाई मानते हैं, दुनिया का कोई ऐसा देश नहीं है जो भारत से दोस्ती नहीं रखना चाहता। यह परिवर्तन आ रहा है, लेकिन एक बात हमें समझ में होगी इस परिवर्तन से जो जो ताकतें घबरा रही हैं, वह केवल हिंदुस्तान में ही नहीं अपितु विदेशी शक्तियां इसमें शामिल हैं। इतिहास आईना होता है उस दौर का, जिस दौर के बारे में लिखा जाता है। उस आईने में सही तस्वीर उतरेगी तभी हम उस के गौरव को समझ सकेंगे। राष्ट्रवादी शक्तियों का हम समर्थन करेंगे ऐसा संकल्प लेना चाहिए। स्वामी विवेकानंद ने भी कहा है उठो जागो और चलते रहो जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए और हमारा लक्ष्य भारत मां को परम वैभव पर पहुंचाना ही नहीं बल्कि भारत मां को परम वैभव पर बनाए रखना है। आओ एकजुट होकर बढ़ें और भारत को विश्वगुरु बनाएं और कुछ ऐसा करें कि दूसरी बार इसे विश्व गुरु बनाने की कोशिश ना करना पड़े, यह हमेशा ही विश्व गुरु बन कर रहे।

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