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NIT हमीरपुर में दीक्षांत समारोह में यू.जी./पी.जी. और पी.एच.डी. स्तर पर कुल 1057 उपाधियाँ प्रदान की गई।

समारोह में संस्थान ने मेधावी छात्रों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर का 12वाँ दीक्षांत समारोह संस्थान के सभागार में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष दोनों माध्यम से आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, भारत सरकार के शिक्षा एवं कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान थे तथा विशिष्ट अतिथि, भारत सरकार के खेल मंत्री, युवा मामले तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री माननीय अनुराग सिंह ठाकुर थे| संस्थान के निदेशक एवं अभिशाषक परिषद के सह-अध्यक्ष, प्रो ललित कुमार अवस्थी ने दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की तथा अभिशापक परिषद के अन्य सदस्यों एवं विद्वत परिषद के सदस्यों ने समारोह में उपस्थित रहकर, इसकी शोभा बढ़ायी।

इस दीक्षांत समारोह में यू.जी./पी.जी. और पी.एच.डी. स्तर पर कुल 1057 उपाधियाँ प्रदान की गई। दीक्षांत समारोह का आयोजन संस्थान के सभागार में किया गया, जिसमें 23. पी.एच.डी. उपाधि प्राप्तकर्ता एवं 33 पदक विजेता स्वयं प्रत्यक्ष रूप से उपस्थिति रहे एवं अन्य सभी छात्रों, उनके अभिभावकों विशिष्ट पूर्व छात्रों आमंत्रित अतिथियों तथा अन्य सभी तक लोगों के लिए कार्यक्रम का ऑनलाइन वेबकास्ट किया गया ताकि वे भी इस समारोह में परोक्ष रूप सम्मिलित हो सकें |

समारोह में संस्थान ने मेधावी छात्रों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। इस प्रक्रिया में, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की छात्रा सुश्री चारु सहगल को वर्ष 2021 के लिए सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर छात्र के रूप में उसकी उपलब्धियों के लिए निदेशक पदक से सम्मानित किया गया | इनके अतिरिक्त विभिन्न यू.जी.तथा पी.जी. कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन और विशिष्ट उपलब्धियों के लिए मेधावी छात्रों को 36 स्वर्ण पदक, 10 रजत पदक और 11 कांस्य पदक प्रदान किए गए। इंजीनियरिंग के यू.जी. पाठ्यक्रम के लिए 06 छात्र/छात्राओं (1. आयुष तिवारी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग; 2. सुश्री संजना, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग; 3.मयंक धीमान, कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग; 4. उज्जवल गुप्ता, कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग; 5. निखिल चौधरी, सामग्री • विज्ञान और इंजीनियरिंग, 6. सुश्री दिव्या सिंह, वास्तुकला ) ने व्यक्तिगत रूप से कार्यक्रम में भाग लिया तथा उन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

इनके अतिरिक्त, इंजीनियरिंग के पी.जी.पाठ्यक्रम के लिए जिन 15 छात्र/छात्राओं ने व्यक्तिगत रूप से कार्यक्रम में भाग लिया, तथा उन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया, उनकी नाम तथा पाठ्यक्रम निम्नवत हैं। 1. सुश्री सफीना नज़ीर, जियोटेनिकल इंजीनियरिंग और अंडर ग्राउंड स्ट्रक्चर, सिविल इंजीनियरिंग; 2. विकास इधवाल, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग; 3. प्रभात शर्मा, परिवहन प्रणाली इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग; 4. सुश्री भारती शर्मा, जल संसाधन इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग; 5. शुभम केतन शर्मा, पर्यावरण इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, 6. सुनील कुमार, थर्मल इंजीनियरिंग (सी.एफ.डी. और एच.टी.), मैकेनिकल इंजीनियरिंग; 7. अक्षय शर्मा, सी.ए.डी.-सी.ए.एम., मैकेनिकल इंजीनियरिंग; 8. जी. विष्णु पवन रेड्डी. वी.एल.एस.आई. डिजाइन स्वचालन और तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग: 9. सुश्री अनुदिता गौर, वी.एल.एस.आई. डिजाइन ऑटोमेशन एंड टेलिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग; 10, वंशज शर्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग (दोहरी उपाधि), इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग; 11. सुश्री नीतीशा नेगी, कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग; 12. सुश्री सलोनी लड्ढा, कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग (दोहरी उपाधि), कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग, 13. सुश्री नेहा सारा वर्गीज, आर्किटेक्चर, मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर; 14. सुश्री मेघाली, रसायन विज्ञान, मास्टर ऑफ साइंस, 15. सुश्री आकांक्षा, गणित और कम्प्यूटिंग, मास्टर ऑफ साइंस

संस्थान के निदेशक एवं अभिशापक परिषद के सह-अध्यक्ष प्रो ललित कुमार अवस्थी ने दीक्षांत समारोह का उद्घाटन किया, जिसके पश्चात समारोह के मुख्य अतिथि एवं भारत सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने सम्बोधन में उपाधि प्राप्त करने वालों को बधाई दी और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर के द्वारा शिक्षा, अनुसंधान और विकास के मोर्चे पर किये गये कार्यों की सराहना भी की। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन.ई.पी.) -2020के अंतर्गत संस्थान के विभिन्न पाठ्यक्रमों में मल्टीपल-एंट्री और मल्टीपल-एग्जिट की अनुमति उपलब्ध है। अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में, संस्थान ने गत वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। संस्थान के शिक्षकों द्वारा पिछले एक वर्ष में लगभग 11 राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट/आईपीआर दाखिल किए हैं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा, संस्थान के 6 शिक्षकों को अपने अपने क्षेत्रों में दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में सूचीबद्ध किया गया है।

उन्होंने उन्नत भारत अभियान में संस्थान के योगदान की भी सराहना की जिसके अंतर्गत संस्थान ने पूरे राज्य में कुल

27 पी. आई. पंजीकृत किये हैं। इन पी.आई. द्वारा स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके सतत विकास, आजीविका के

साधन आदि को बढ़ावा देने के लिए 100 से अधिक गांवों को गोद लिया गया है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार देश के कई प्रमुख संस्थानों में नए स्टार्ट-अप, टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्यूबेटर्स की स्थापना का समर्थन कर रही है। भारत सरकार को इस देश के युवाओं की नेतृत्व क्षमता का आभास है. एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी विभिन्न परियोजनाएं भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गयीं हैं। एक उद्यमी अनेक व्यक्तियों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से रोजगार देता है अतः उन्होंने छात्रों से उद्यमिता अपनाने का आग्रह किया क्योंकि इससे लोगों के लिए आजीविका बनाने में मदद मिलेगी तथा देश का उत्थान संभव होगा।

उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र व छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस राष्ट्र एवं हमारी मातृभूमि ने हम सभी का भविष्य बनाया है अतः यह हमारी संयुक्त जिम्मेदारी है कि हम भी इस राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करें। आप युवा ही भविष्य के भारत की उम्मीद हो विशिष्ट अतिथि माननीय स्खेल मंत्री, युवा मामले एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारत सरकार अनुराग सिंह ठाकुर ने सभी पदक एवं उपाधि प्राप्तकर्ताओं को उनकी सराहनीय उपलब्धियों के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया
प्रतिस्पर्धी दुनिया में हमें अपनी पहचान और कद को बनाए रखने के लिए हर समय तत्पर रहना

होगा। संस्थान को अपने शैक्षणिक मानकों के लिए दुनिया भर में पहचाना जाना चाहिए और शिक्षण और अनुसंधान,

उद्यमिता और बौद्धिक संपदा के निर्माण के मामले में भारत के सर्वश्रेष्ठ तकनीकी संस्थानों में एक होना चाहिए, जिसके

लिये संस्थान सभी शिक्षकों अधिकारियों कर्मचारियों तथा छात्रों को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, आत्म निर्भर भारत अभियान, वोकन फॉर लोकल, डिजिटल इंडिया उन्नत भारत अभियान, एक भारत श्रेष्ठ भारत आदि जैसी कई पहल की हैं। ये पहल नवाचार और उद्यमिता की दुनिया में प्रवेश के द्वार खोल रही हैं। उन्होंने संस्थान में कई सुधारों को शुरू करने के लिए संस्थान के निदेशक प्रो. ललित कुमार अवस्थीद्वारा किए गए प्रयासों की सराहना भी की।

उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र व छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह सही समय है कि वे खुद को अपने जीवन के मिशन और विजन को परिभाषित करने का मौका दें। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रचुर जैव विविधता के साथ 500 मिलियन से अधिक युवाओं की उपलब्धता के साथ, हमारा देश दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार हैं। सबसे बड़ी युवा आबादी वाला राष्ट्र होने के नाते, पूरी दुनिया भारत को तकनीकी जनशक्ति के स्रोत के रूप में और मानव जाति की मदद करने वाले नए नवाचारों के पहिये के रूप में देख रही है। उन्होंने सभी उपाधि प्राप्तकर्ताओं को उनके एवं राष्ट्र के उन्नत भविष्य के लिये शुभकामनाएं भी दी।

संस्थान के निर्देशक एवं अभिशापक परिषद के सह-अध्यक्ष, प्री ललित कुमार अवस्थी अपने संबोधन में सभा को बताया कि हम सभी युवाओं की उपलब्धि की खुशी को साझा करने के लिए इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए यहां हैं। उपाधि प्राप्तकर्ताओं को अपने संदेश में उन्होंने कहा कि आपने जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है एवं भविष्य के लिए आप युवाओं के समक्ष अनेक विकल्प खुले हैं। मुझे विश्वास है कि आप अपने लिए सर्वोत्तम विकल्प का चुनाव करेंगे एवं अपना संस्थान का एवं इस राष्ट्र का नाम उन्नत करेंगे।
संस्थान के निदेशक प्रो. ललित कुमार अवस्थी ने संस्थान के बारे में निदेशक की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुये बताया कि

वर्तमान में संस्थान में विभिन्न यू.जी. और पी.जी. कार्यक्रमों में लगभग 4000 छात्र अध्ययनरत हैं, जिनके लिये

संस्थान में पिछले तीन वर्षों में 75 नये शिक्षकों सहित कुल 162 शिक्षक उपलब्ध हैं।

संस्थान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन.ई.पी.)-2020 के प्रावधानों को लागू करने के लिए आवश्यक पहल प्राम्भ कर दी है। संस्थान प्रत्येक पांच वर्ष में छात्रों की संख्या को दोगुना करने के लिए तत्पर रहेगा, ताकि उच्चतर शिक्षा में सकल नामांकन में सुधार के लिए भारत सरकार के वर्ष 2035 तक 3.5 करोड़ छात्र छात्राओं के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सफे।

उन्होंने गत वर्षों में संस्थान के अनुसंधान और विकास में प्रगति पर भी प्रकाश डाला। संस्थान के छात्रों और शिक्षकों ने गत वर्ग अनक्रमित पत्रिकाओं और सम्मेलनों में लगभग 240 शोध पत्र प्रकाशित किए हैं तथा संस्थान द्वारा लगभग

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